भजन-31
नाम कीर्तन करों तुम सुधर जाओंगे
पाके हरि प्रेम निश्चित ही तर जाओंगे
1.
चाहे हो तुम पतित या पवित्र आत्मा
गाके
हरि नाम भक्ति का रस पाओंगे नाम कीर्तन.........
2.
करके करुणा मनुज देह प्रभु ने
दिया
क्यों
नहीं राम का नाम तुम गाओंगे नाम कीर्तन.........
3.
शुद्ध होगा ह्रदय नाम कीर्तन से
ही
प्रेमियों
के चरण में ही तुम धाओगे नाम कीर्तन.........
4.
दास सेवा बिनय नाम प्रेमी बनो
राम निज
दास के हिय में तुम छाओंगे नाम कीर्तन.........
*****