भजन-39
प्रभु सभ में
समभाव विराजे,
सब का करे उद्धार, बरस रही प्रभु की कृपा
अपार।
1. कान मिले सत्संग सुनने
को
नयन मिले दरशन करने को
हाथ मिले सेवा करके नर, मानव जनम सुधार, बरस रही......
2. जीभ मिली हरिनाम जपन
को,
बुद्धि मिली है, श्रवन मनन को,
श्रवन मनन नित्य अध्ययन करके, हो जा भव से पार, बरस रही......
3. धन यौवन का मान ना
कीजे,
मानव जनम सफल कर लीजे,
राम नाम का सुमिरण करके, हर में हरि निहार, बरस रही......
4. सत्संग सेवा सुमिरन कर
ले,
श्रद्धा भक्ति से जीवन भर ले,
राम कथा की गंगा नहाने, भिक्षु कहे पुकार, बरस रही......
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